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मुनगा (सहजन) व गिलोय है पोषक और आयुर्वेदिक गुणों का भण्डार

मुनगा (सहजन)

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मुनगा (सहजन)

मुनगा (सहजन) की फली के बारे में तो हम सभी जानते हैं जिसका वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। यह लगभग हर घर में सब्जी के रूप में बनती है। सहजन की फली एवं पत्तों का उपयोग सब्जी के अतिरिक्त स्वास्थ्य वर्धन के लिए भी किया जाता है।

दुनिया का सबसे पोषण पूर्ण आहार है मुनगा (सहजन), जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार से पोषण के लिए होता है। विभिन्न वैज्ञानिक शोधों से ज्ञात हुआ है कि सहजन में हमारे शरीर के लिए नित्य प्रतिदिन उपयोगी तत्वों की भरमार है। स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली और पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, विटामिन- A ओर C प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

सहजन के पेड़ का कोई एक भाग ही नहीं बल्कि इसके फल के अतिरिक्त इस पेड़ के सभी भाग जैसे- फूल, छाल, पत्तियां सभी का पोषक एवं औषधीय महत्व है।


गिलोय

गिलोय को आयुर्वेद में सबसे महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों में से एक माना जाता है जिसका वैज्ञानिक नाम टिनोस्पोरा कार्डिफोलिया है। गिलोय का पर्याय अमृता भी है, जो अमृत का भारतीय नाम है क्योंकि इसका प्रभाव व्यक्ति के शरीर पर अमृत से कम नहीं होता। यह विभिन्न प्रकार के रोगों के उपचार में बहुत ही उपयोगी है। गिलोय की बेल को टुकड़ों में विभाजित करके उनका रस निकालकर उपयोग किया जाता है। औषध के लिए इसका तना ही सर्वाधिक उपयोगी माना जाता है।

गिलोय के पत्ते देखने में बिल्कुल पान के पत्तों की तरह लगते हैं जिसे हम अपने घर में, बाग-बगीचे में या फिर घर की दीवार या पेड़ के साथ आसानी से लगा सकते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि गिलोय जिस पेड़ के ऊपर चढ़कर फैलती है उसके सारे गुण अपने में समाहित कर लेती है।

सहजन और गिलोय कहीं भी आसानी से उगाए जा सकते हैं। इनकी उपयोगिता को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन, आयुष विभाग द्वारा मानसून में बड़े पैमाने पर सहजन और गिलोय का रोपण किया जा रहा है।
तो आइये इस मानसून अपने घर के बगिया में इन पौधों को लगाकर अपने बगिया को आयुर्वेद और पोषक के गुणों से भर दें।

मुनगा (सहजन) व गिलोय के आयुर्वेदिक एवं पोषक गुणों को जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर इन पौधों के बारे में अपने विचार/सुझाव अपने नाम और जिले के साथ साझा करें।

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1 Record(s) Found

Ajay pandey 1 year 1 week ago

Munaga Lagao competition shoul be held in August month and it has to be monitored by jan Abhigyan parishad in Gram panchayat level. JAB JADA MUNAGA LAGEGA TO KAISE NAHI KUPOSHAN BHAGEGA.