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जश्न-ए-आजादी : स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश का क्या योगदान रहा? विचार व्यक्त करें!

देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम यानि सन् 1857 की क्रांति ने देश ...

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देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम यानि सन् 1857 की क्रांति ने देश की आजादी के लिये एक अहम भूमिका अदा की थी। इस क्रांति में मध्य प्रदेश का बहुत बड़ा योगदान रहा है। मध्य प्रदेश का एक ऐसा जिला जिसे आंदोलनकारियों के लिए सैन्य मुख्यालय का रूप दिया गया और उस जिले को CRPF की जन्मस्थली बना दिया गया। आपको ज्ञात होगा कि ब्रिटिश शासन के दौरान इस जिले में एक छावनी स्थापित की गई थी। आजादी के बाद इस छावनी को भारत की पैरामिलिट्री सेना की छावनी में परिवर्तित कर दिया गया।

1857 की क्रांति भले ही अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने में कामयाबी हासिल न कर पाई हो लेकिन इस क्रांति की वजह से पूरे मध्यप्रदेश में अंग्रेज़ों के विरुद्ध विद्रोह का ऐलान हो चुका था। ऐसे में आंदोलनकारियों का एक ही लक्ष्य था अंग्रेज़ों को कमजोर कर उन्हें मध्य प्रदेश की मातृभूमि से बाहर का रास्ता दिखाना। परिणामस्वरूप क्रांतिकारियों ने एक बड़ी तादाद में इकट्ठा होकर मध्य प्रदेश के जिले में स्थित ब्रिटिश सरकार की तत्कालीन सैन्य छावनी पर हमला कर दिया। छावनी में अंग्रेज़ों के अधीन काम करने वाले भारतीय सैनिकों ने भी क्रांतिकारियों के साथ हाथ मिला लिया और उन्होंने अपने ब्रिटिश अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

इस क्रांति के समय जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देशभर में घूम-घूम कर आजादी की लड़ाई के लिए लोगों में जज्बा पैदा कर रहे थे उसमें मध्य प्रदेश जिले के कई कांतिकारियों औऱ सेनानियों का अहम योगदान रहा। इस लड़ाई में कई महान गायक, संगीतकार, कलाकार, राष्ट्रीय कवि, चित्रकार, समाजसुधारक, नेतागण, स्थानीय राजा, महाराजा, महारानी और नवाबों का योगदान भारत देश कभी नहीं भुला पाएगा।

72वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की आजादी के प्रति मध्यप्रदेश का क्या योगदान रहा और किन-किन महान आंदोलनकारियों और क्रांतिकारियों ने आपके जिले से देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई उनसे जुड़े विचार mp.mygov.in पर साझा करें।

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sourav singh yadav 1 year 3 months ago

भोज ओपन यूनिवर्सिटी देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मध्य प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर रिसर्च करेगा। प्रदेश से जुड़े सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर रिसर्च करने के साथ ही उनकी जीवन पर किताबें भी प्रकाशित करेगा। यह काम अटल बिहारी वाजपेयी चेयर के माध्यम से किया जाएगा।
भोज विश्वविद्यालय देश के पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर एक चेयर स्थापित करने जा रहा है। इस पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है।