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# NoShame in Menstruation: बात करने से ही बात बनेगी!

माहवारी (पीरियड्स) के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन उन दिनों ...

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माहवारी (पीरियड्स) के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन उन दिनों महिलाओं को होने वाली परेशानियों पर खुलकर बात करने से हम आज भी झिझकते हैं। एकीकृत बाल विकास सेवा, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रोजेक्ट उदिता के अनुसार-

• 88 प्रतिशत महिलाएं माहवारी के दौरान कपड़े, राख, मिट्टी, सूखे पत्ते आदि का उपयोग करती हैं।
• केवल 12 प्रतिशत महिलाएं ही सेनेटरी नेपकिन का उपयोग करती हैं।
• 42 प्रतिशत महिलाएं एक एक ही कपड़े को बार-बार उपयोग करती हैं।
• 29 प्रतिशत महिलाएं माहवारी के दौरान गंदे कपड़ों का उपयोग करती हैं।
• महिलाएं जो माहवारी के दौरान सेनेटरी नेपकिन का उपयोग नही करती, उन्हें प्रजनन मार्ग के संक्रमण के जोखिम की संभावना 70 प्रतिशत तक अधिक होती है।

ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत, मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में ‘माहवारी’ स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जागरूकता हेतु स्व-सहायता समूह की महिलाएं सामने आई हैं। वहीँ पिछले दो वर्षों में सेनेटरी पैड बनाने की तीन इकाईयां जिले में स्थापित की जा चुकी है। वहाँ से महिलाएं सस्ते ‘पैड’ तैयार कर गाँवों में बेच रही हैं।

इस विषय पर चुप्पी तोड़ने और खुलकर बात करने की जिम्मेदारी इन महिलाओं ने ‘पैडवूमन’ बनकर उठाई है।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार माहवारी स्वास्थ्य स्वच्छता में ग्रामीण मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश में सबसे खराब रहा है।

एकीकृत बाल विकास सेवा
, महिला एवं बाल विकास विभाग उदिता योजना चला रहा है। विभाग सभी नागरिकों से #NoShame in Menstruation विषय पर खुल कर बात करने की अपील करता है। जिससे माहवारी को लेकर वर्षों से स्थापित धारणा को बदला जा सके।

विभाग निम्नलिखित बिन्दुओं पर नागरिकों से उनके विचार जानना चाहता है:

• लड़कियों को ‘माहवारी’ के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखने के बारे में पर्याप्त जानकारी देना
• सेनेटरी पैड के सुरक्षित उपयोग के बारे में बताना
• कम कीमत में सभी लड़कियों को सेनेटरी पैड उपलब्ध हो
• सेनेटरी पैड को सही तरीके से डिस्पोज करने के उपाय
• माहवारी के दौरान पोषण का ध्यान रखना

आइए #NoShame in Menstruation अभियान का हिस्सा बनें और इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार/सुझाव साझा करें।

All Comments
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26 Record(s) Found

Ankit singh 2 months 3 weeks ago

आज की २१सदी में हम सभी आगे तो बढ़ रहे हैं, लेकिन समाज की उन्नति में कहीं न कहीं पिछड़े हैं।
सोचता हूं तो मुझे दुःख होता है,कि जिस मां की कोख से हमारा जन्म हुआ। आज उसी कि उपेक्षा की जाती है।
शाश्न्नो में नारी की महिमा को बताया गया है लेकिन रुढ़िवादी समाज ने अपने ही अनुसार नियमे बना लिए।
समाज के हर युवा को जागना होगा। और समाज की हर एक एक बुराई को जड़ से खत्म करना होगा। बेटी व बेटा तो विकास के दो हाथ है, फिर क्यो भेदभाव होता है।
जागो बेटीयों। बुराई को खत्म करो।

PIYUSH KUMAR 3 months 1 day ago

यह काफी दुःख की बात है कि वर्तमान आधुनिक सदी में महिलाएं आज भी महावारी पर खुल कर बात करने से हिचकिचाती है। यदि हम भारत जैसे विकासशील देश की बात करे तो हम यह देखते है कि यहां हालात बदतर है।मेरे विचार से महिलाओं में महावारी पर जागरूकता के लिए छोटे कक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा इसके अलावा गांवाे में नुक्कड़ नाटकों,रैलियों व प्राथमिक चिकित्सालयों द्वारा जागरूकता अभियान,विज्ञापनों व सनेटरी पैड का समुचित उपयोग के लिए गांवो में जागरूकता अभियान चलना होगा।

Buddhasen Patel 3 months 2 weeks ago

AGLINE FOR मानव अधिकार आयोग
1)सबको समान अधिकार ,मानव अधिकार आयोग करे सबके सपने साकार ||

2)जब होगी मानव अधिकारों की रक्षा ,समाज में सबका विकास होगा अच्छा ,,

3)मानव अधिकार आयोग ,गरीब अमीर सबको समानता का अधिकार ,,

4)मानव अधिकार आयोग ,नागरिको का हित सर्वोच्य प्राथमिकता ,,

5)मानव अधिकार आयोग, सबको मिले न्याय,सबके अधिकार की हो रक्षा ,,

6)मानव अधिकार आयोग ,प्रगतशील समाज ,विकासशील राष्ट्र ,,

7)मानव अधिकार आयोग ,अवरनेस फॉर कम्युनिटी,,

Parminder 4 months 2 days ago

Yes #No shame in menstruation but this thing is going to implement when we are going to implement all these things in our house level.Still we do not talk about these things at home.

Rohit Hardiya 4 months 4 days ago

gaon me to mahilaye kam sakchhar hone ki wajah se ya television k bavjud unhe pad k bare mai samaj nahi pati or nahi ye ki iska smband unke swasthya se juda h iske liye gao me vises campayojit kiye jane chahie jis tarah polio, khasra adi campain chalaye jate hai usi tarah se ayojit kiye jane chahiye unhe iske prasikskhit kiya jana chahiye or ise bade campain ki b avsyakta h kyonki chhote sahro me b kahin bahut si mahilaye hoti h jo pad ka istemal nahi karti iska jyada prachar karna chahiye

NANDIKANTI SAI KUMAR 4 months 4 days ago

Awareness on Menstruation should be done from smaller classes like 4 th standard in schools. It is done at higher classes like 9 th standard.Friends should also discuss about Menstruation as it a biological process.Central government instead of putting GST on Sanitary napkins,they should be provided free of cost in all government schools every month .Through print and electronic and social media more awareness should be done.celebrities should come voluntary to do awareness in rural,tribal areas

Ramakrishna Lakshmanan 4 months 6 days ago

Menstruation is a natural biological process and part of overall
growth. Nothing to feel ashamed about it. Awareness must be created about menstruation and how to deal with it. Awareness must be created about the safe and hygienic use of sanitary pads that must be made available at low cost. Camps must be held across the state in which trained women must teach other women about safe and hygienic use of sanitary pads. A woman representative from every village must volunteer for this cause.

Mahendra Patel 4 months 6 days ago

हर गांव और हर शहर हर क़स्बा जहा दूर दूर तक कोई सिटी या शहर नहीं हो वहा की लडकिया या ओरत इस समय जब माहवरी होती हैं तब वो पेड नहीं ख़रीद सकती क्योंकि वहां वो पेड नहीं मिलता और पेड अधिकतर शहर में ही मिलता हैं । ईसलिए उनके पास कपडा लगाने के सिवाय और कोई चारा नहीं रहता । यदि सरकार एक कदम उठाये और हर गांव में जहा ये पेड उपलब्ध नहीं होता वहा पहुचाये और आंगनवाड़ी में काम करने वाली बाई घर घर जाकर ये बताये की इससे क्या फायदा होता हैं ।

sandip ghayal 4 months 1 week ago

sanitary pads को हर school एवम् अंगणवाडी केंद्रो वा सरकारी असपताल में मोफत रूप से रखने से ईस समस्या का समाधान हो सकता हैं|