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Inviting ideas and suggestions for Viskit Gwalior @2047 Vision Document

Start Date: 03-01-2025
End Date: 30-01-2025

विकसित ग्वालियर@2047 - विजन डॉक्यूमेंट के लिए अपने सुझाव साझा ...

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विकसित ग्वालियर@2047 - विजन डॉक्यूमेंट के लिए अपने सुझाव साझा करें

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा संकल्पित विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में मध्यप्रदेश भी अपना योगदान देने लिए अग्रसर है तथा इसी संकल्प के साथ विकसित मध्‍यप्रदेश@2047 का विजन तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास की दिशा में अग्रसर है और “विकसित भारत” के निर्माण में “विकसित मध्यप्रदेश” की भूमिका को सशक्त बनाने के लिए कृत संकल्पित है। इसी क्रम में, 2047 तक ग्वालियर को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए “विकसित ग्वालियर@2047” विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया जा रहा है।

विकसित ग्वालियर@2047 विजन डॉक्यूमेंट को तैयार करने में नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु जिला स्तर पर विभिन्न जनसंवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

“विकसित ग्वालियर@2047” की सफलता के लिए नागरिकों के आईडिया और सुझाव सबसे महत्वपूर्ण हैं। यह पहल हर नागरिक को ग्वालियर के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने का अवसर देती है। नागरिक अपने सुझाव mp.mygov.in पर साझा कर सकते हैं।

नागरिकों के सुझाव के प्रमुख क्षेत्र:

• विकसित ग्‍वालियर @ 2047 के विजन के लिए सुझाव
• आर्थिक विकास और रोजगार अवसरों के लिए प्राथमिक क्षेत्र में सुझाव
• महिलाओं (नारी सशक्तिकरण) के लिए प्राथमिकता, फोकस क्षेत्र एवं पहल/परियोजनाएं
• किसानों (किसान कल्‍याण) के लिए प्राथमिकता, फाेकस क्षेत्र एंव पहल/परियोजनाएं
• निम्‍न आय वर्ग के नागरिकों (गरीब कल्‍याण) के लिए प्राथमिकता, फोकस क्षेत्र एवं पहल/परियोजनाएं
• युवाओं (युवा शक्ति) के लिए प्राथमिकता, फोकस क्षेत्र एवं पहल/परियोजनाएं
• जनजातीय विकास के लिए प्राथमिकता, फोकस क्षेत्र एवं पहल/परियोजनाएं
• अन्‍य जिला प्राथमिकताएं एवं विकास कार्य

नागरिकों के सुझाव, ग्वालियर के वास्तविक मुद्दों और आवश्यकताओं को समझने में मदद करते हैं। विकास की प्राथमिकताओं को सही दिशा देने में सहायक होते हैं। ग्वालियर जिले के भविष्य को एक समावेशी और सतत विकास की ओर ले जाते हैं।

MP MYGov द्वारा आपके आईडिया और सुझाव आमंत्रित है। अपने सुझाव देकर विकसित ग्वालियर@2047 के निर्माण में आप भी भागीदार बनें। आप अपने सुझावों के साथ अपना नाम, गाँव/शहर, जिला, पिनकोड एवं मोबाइल नं. भी अंकित करे ।

आइए, हम सब मिलकर बनाएं विकसित ग्वालियर...अपने सुझाव नीचे कमेन्ट बॉक्स में साझा करें

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361 Record(s) Found

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

निष्कर्ष:
जनजातियाँ भारतीय जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण भाग है। वे कुल जनसंख्या का लगभग 8.6% हैं। भारत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उपर्युक्त उपायों को लागू करके और आदिवासी कल्याण के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर, भारत अपने आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में कार्य कर सकता है।

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा:- आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार करना। स्कूलों और स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों के निर्माण और बुनियादी ढांचे में सुधार से आदिवासी समुदायों की कल्याण और भविष्य की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
रोजगार के अवसर:- आदिवासी क्षेत्रों में कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना। इससे शोषणकारी श्रम बाजारों पर निर्भरता कम होगी और स्थायी आजीविका के विकल्प उपलब्ध होंगे।

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

पुनर्वास और मुआवजा:- विकास परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी समुदायों का उचित पुनर्वास और मुआवजा देना चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विस्थापित जनजातियों को उचित मुआवजा,पर्याप्त आवास और स्थायी आजीविका के अवसर प्राप्त हों।

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

कानूनी संरक्षण:- वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो आदिवासी समुदायों के उनकी पारंपरिक भूमि पर अधिकारों को मान्यता के साथ-साथ सुरक्षा भी प्रदान करता है।
समावेशी विकास:- यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास परियोजनाएँ स्थानीय समुदायों की पूर्ण सहमति और भागीदारी के पश्चात् ही प्रारम्भ की जानी चाहिए।परियोजनाओं का उद्देश्य विस्थापन और शोषण के स्थान परजनजातीय आजीविका का उत्थान और उनकी संस्कृति को संरक्षित करना होना चाहिए।

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

एकाकी जनजातियों की सुरक्षा:- एकाकी जनजातियों और उनके आवासों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानी रखनी चाहिए। उनके जीवन में किसी भी हानिकारक हस्तक्षेप को रोकने के लिए “आँखें रखो, हाथ हटाओ” नीति को सख्ती से लागू करना चाहिए।

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

जागरूकता और संवेदनशीलता:- सरकारी अधिकारियों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जन समान्य के बीच आदिवासी समुदायों के अधिकारों और मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करना। इन समुदायों के सामने आने वाली विशिष्ट चुनौतियों के प्रति उन्हें संवेदनशील बनाना।

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

भूमि अधिकार:- स्थानीय और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आदिवासी समुदायों के पास उनकी भूमि का स्पष्ट और निर्विवाद स्वामित्व हो। भूमि-हस्तांतरण से सम्बंधित मुद्दों का समाधान करना चाहिए और अवैध भूमि अधिग्रहणों के खिलाफ सख्त कार्रवायी करनी चाहिए।

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

सामुदायिक सशक्तिकरण:- आदिवासी समुदायों को उनके जीवन और संसाधनों से संबंधित निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सम्मिलित कर सशक्त बनाना चाहिए। उनकी पारंपरिक शासन प्रणालियों और सांस्कृतिक संस्थानों को पहचान कर,उन्हें सरंक्षित करना चाहिए।

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षण:- आदिवासी समुदायों की अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए उपाय सुनिश्चित करना चाहिए। पारंपरिक प्रथाओं और शिल्पों को प्रोत्साहित करना चाहिए और उनके पवित्र स्थलों एवं सांस्कृतिक स्थानों को सरंक्षित करना चाहिए।

BrahmDevYadav 1 year 1 week ago

जनजातियों की क्या समस्याएं हैं, समाधान हेतु शासन द्वारा क्या प्रयासों किये गए है।
राज्य में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अनुसूचित जनजातियों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किये गये है लेकिन ग्वालियर क्षेत्र में निवासित जनजातियां आज भी अत्यन्त पिछड़ी हुई है तथा गरीबी, ऋणग्रस्तता, बधुंआ मजदूरी,अशिक्षा,अंधविश्वास आदि के कुचक्र में बुरी तरह जकड़ी हुई है।उन्हें इससे निकालकर नए रोजगार, सुविधाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शासन द्वारा विशेष प्रयास किया जाना चाहिए।